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मैदान पर फिर गूंजा नाम: Brendan Taylor की वापसी और भारत में इस पर मचा शोर

शुरुआत: सिर्फ एक क्रिकेट वापसी नहीं

क्रिकेट की दुनिया में कुछ कहानियाँ सिर्फ आंकड़ों से नहीं, दिल से लिखी जाती हैं। ज़िम्बाब्वे के पूर्व कप्तान ब्रेंडन टेलर की वापसी भी ऐसी ही कहानी है। लगभग साढ़े तीन साल के बैन, विवाद और निजी संघर्ष के बाद, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में फिर कदम रखा है। भारत में यह खबर इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि इसमें क्रिकेट, विवाद और इंसानी जज्बात—सबकुछ है।



भारत में क्यों ट्रेंड कर रहा है यह नाम

भारत में टेलर की चर्चा इसलिए बढ़ गई क्योंकि—

  1. उनका बैन एक ऐसे भारतीय बिजनेसमैन से जुड़े ऑफर के बाद लगा था, जिसने उन्हें $15,000 देने की कोशिश की थी।
  2. उनकी वापसी में मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लड़ाई से जीत की कहानी है—जो भारतीय दर्शकों को भी गहराई से छूती है।

विवाद की जड़ और गिरावट का दौर

2019 में भारत यात्रा के दौरान टेलर को एक शख्स ने ऑफर दिया—बड़े पैसों के साथ गलत खेल में शामिल होने का। टेलर ने यह ऑफर तुरंत ICC को रिपोर्ट नहीं किया, और उसी दौरान उनका डोप टेस्ट भी पॉज़िटिव आया, जिसमें कोकीन मेटाबोलाइट पाया गया।
जनवरी 2022 में ICC ने उन्हें साढ़े तीन साल के लिए क्रिकेट से दूर कर दिया। यह वक्त उनके लिए सबसे मुश्किल साबित हुआ—उन्होंने खुद कहा, "ऐसे दिन भी थे जब बिस्तर से उठना तक भारी लगता था।"


पुनर्वास और नई शुरुआत

टेलर ने खुद को फिर से संभालने के लिए 90 दिन का रीहैब प्रोग्राम किया। फिटनेस, मानसिक मजबूती और परिवार का सहारा—यही उनकी ताकत बना। ज़िम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी में उन्हें वापसी का मौका दिया, और उन्होंने इसे "डेब्यू जैसा एहसास" बताया।


मैदान पर वापसी

7 अगस्त 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में, टेलर ने वापसी करते हुए 107 गेंदों पर 44 रन बनाए। विकेट गिरते रहे, लेकिन उन्होंने धैर्य और क्लास दोनों दिखाए। दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं—जैसे किसी पुराने हीरो को फिर से मैदान में देखने का रोमांच हो।


लंबा करियर और नया अध्याय

इस वापसी के साथ टेलर का टेस्ट करियर 21 साल 93 दिन का हो गया—जो उन्हें दुनिया के सबसे लंबे टेस्ट करियर वाले खिलाड़ियों में 12वें स्थान पर ले गया। इस लिस्ट में वे जेम्स एंडरसन को भी पीछे छोड़ चुके हैं।


भारतीय नजरिए से मायने

भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, भावना है। जब कहानी में संघर्ष, गलती, पछतावा और फिर वापसी का जज़्बा हो—तो यह दिल को छू जाती है। टेलर की यात्रा यह भी याद दिलाती है कि दूसरा मौका सिर्फ खेल में नहीं, ज़िंदगी में भी संभव है।


निष्कर्ष

ब्रेंडन टेलर की वापसी में सिर्फ रन या रिकॉर्ड नहीं—बल्कि इंसान के गिरने और फिर उठने की हिम्मत की कहानी है। भारत में यह ट्रेंड इसलिए है क्योंकि हम ऐसी कहानियों को सराहते हैं जो हमें खेल के साथ-साथ जीवन का सबक भी देती हैं। आगे उनका प्रदर्शन चाहे जैसा भी हो, उनकी यह पारी—जीवन की पारी—हमेशा याद रहेगी।


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